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Wednesday, June 7, 2017

एक छोटा बीज

एक छोटा बीज, ज़मीन के अंदर था
आँख बंद करके, वो सोया रहता था

टिपुर टिपुर बारिश, बीज पे गिरती थी
सरकते सरकते सरकते, वो सरकता चला गया

एक समय आया, सूरज ने प्रकाश डाला
सूरज की किरणें बोली, अब तू बहुत सो लिया

बीज ने ली अंगड़ाई, और वो उठ गया
इधर उधर देखके वो नाचने लगा

एक छोटा पौधा, अब वृक्ष में बदल गया
आसपास के गाँव में वो छाँव देने लगा

आते जाते लोगों को वो छाँव देने लगा
आहा छाँव देने लगा, आहा  छाँव देने लगा

[My daughter performed this song in her first ever school gathering. She could sing it all very well and performed it superbly. Not only is the song beautiful, but my daughter's rendition makes it all the more lovely.]

Wednesday, July 13, 2011

राजहंस सांगतो किर्तीच्या तुझ्या कथा

राजहंस सांगतो कितीर्च्या तुझ्या कथा
हृदयी प्रीत जागते जाणता, अजाणता


पाहिले तुला न मी, तरी ही नित्य पाहते
लाजूनी मनोमनी, उगीच धूंद राहते
ठावूक न मजसी जरी निषध देश कोणता


दिवस रात्र ओढणी, या मनास लागते
तुझीच जाहल्या परी, मी सदैव वागते
मैत्रिणीस सांगते, तुझी अमोल योग्यता


निमंत्रणाविना पुन्हा हंस येई तो वनी
नाद चित्र रेखितो, तुझेच मंद कुजनी
वेड वाढवून तो उडून जाय मागूता


गीतकार: ग. दि. माडगुळकर
संगीतकार: सुधीर फडके
गायक: आशा भोसले
चित्रपट: सुवासिनी (१९६१)

A Homeless Night